मुजफ्फरनगर जिला- यहां क्षत्रियों के पास रहती है जीत कि चाबी

मुजफ्फरनगर जिले के बारे मे चर्चित है कि ये जाट बहुल जिला है जो कि बहुत बड़ी गप्प है. जबकि असलियत मे यह मुस्लिम बहुल जिला है जहां हर सीट पर 35% से 42% तक मुस्लिम वोट हैं. जाति के आधार पर यह मिश्रित आबादी वाला जिला है जहां गैर दलितों मे किसी भी जाति कि 10% आबादी भी नहीं है. किसी जाति का बाहुल्य माने जाने के लिए उस जिले मे कम से कम 20% आबादी तो उस जाति कि होनी ही चाहिए लेकिन मुजफ्फरनगर मे जाट वोट मात्र 8% ही हैं.


जाटों के अलावा क्षत्रिय, सैनी, वैश्य, ब्राह्मण भी ज्यादा पीछे नहीं है. इसके अलावा कश्यप, त्यागी और पाल समाज कि भी जिले मे अच्छी आबादी है. अल्पसंख्यक जातियां जैसे जोगी, गुसाईं, नाई, धीमान आदी भी मिलकर बहुत बड़ा वोट बैंक बनाती हैं.


इन सभी जातियों मे राजनीतिक जागरूकता और नेतृत्व का अभाव था, जिस कारण एक दशक पहले तक जिले कि राजनीति मे इन समाजो के वोटो कि गिनती ही नहीं होती थी. नेतृत्व के अभाव के कारण कश्यप, सैनी, पाल, त्यागी आदी जातियां किसान राजनीति के प्रभाव मे आकर जाट उम्मीदवारो को ही वोट कर आती थी. इसी तरह देहात क्षेत्र के मुसलमानो मे भी नेतृत्व के अभाव और किसान राजनीति के प्रभाव के कारण जाट उम्मीदवारो को वोट करने कि प्रवृत्ति थी. जिस कारण इस क्षेत्र के जाट बहुल होने कि मिथ्या धारणा प्रचलित हो गई. अन्य जातियों को अपनी आबादी का ही एहसास नहीं था जिस कारण विभिन्न पार्टियों द्वारा जाट उम्मीदवारो को ही टिकट दिया जाता था.


लेकिन पिछले एक दो दशक मे सैनी, कश्यप, पाल आदी जातियों को अपनी ताकत का एहसास हुआ है और ना केवल इन जातियों के नेता टिकट कि मांग करते हैं बल्कि चुनाव लड़ कर विधायक भी बन रहे हैं.


2014 से भाजपा के काल मे जिले कि ये सभी गैर जाट गैर जाटव हिन्दू जातिया एकमुश्त होकर भाजपा को वोट कर रहीं हैं. हर विधानसभा मे 40% से लेकर 50% तक इस हिंदूवादी समाज का वोट बैंक है. भाजपा के जाट प्रत्याशी तक 90% जाट वोटो के विरोध मे गिरने के बावजूद इस गैर जाट वोट बैंक के दम पर सांसद, विधायक से लेकर जिला पंचायत सदस्य बन रहे है. भाजपा के जाट प्रत्याशियों को मिलने वाले वोट मे 95% या उससे अधिक योगदान इस गैर जाट वोट बैंक का ही होता है. लेकिन प्रत्याशी कि जाति के कारण प्रदेश और देश मे जाट बाहुल्य होने कि धारणा प्रबल होती है. लेकिन सच्चाई से अवगत होने के कारण स्थानीय भाजपा नेतृत्व भाजपा समर्थक जातियों को संगठन एवं टिकट मे वरीयता दे रहा है.


लेकिन इसी काल मे जिले मे क्षत्रिय समाज ही ऐसा है जिसकी राजनीतिक उन्नति के बजाए अवनति हुई है. मुजफ्फरनगर जिले के क्षत्रिय समाज का हमेशा से ही अलग राजनीतिक वजूद रहा है. ये अकेली जाति है जो जाटों की किसान राजनीति के आभामंडल से मुक्त रही है. क्षत्रियों ने पुरानी बघरा और कांधला-बुढ़ाना जैसी सीटो पर जीत हासिल की थी जिनके बारे मे ये प्रचारित था की ये जाटो की आबादी के मामले मे जिले की छपरौली हैं. बघरा से ठाकुर नकली सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर और कांधला-बुढ़ाना से ठाकुर विजयपाल सिंह ने कम्युनिस्ट पार्टी के टिकट पर विधायक बन कर चौधरी चरण सिंह की राजनीति को चुनौती दी थी. क्षत्रियों के अधिकतर गांव यहां समूह मे मिलते हैं जिस कारण इनकी ताकत और बढ़ जाति है. 


जिले का क्षत्रिय समाज मोदी युग से पहले से ही भाजपा का आधार वोटबैंक रहा है जो मंदिर आंदोलन के समय से ही एकतरफा भाजपा को वोट करता आ रहा है. जिले मे क्षत्रिय समाज भाजपा का सबसे बड़ा और वफादार वोटबैंक है लेकिन मोदी युग मे भाजपा के उत्कर्ष काल मे ही जिले मे क्षत्रियों का राजनीतिक पतन हुआ है. जाटों के 8% के मुकाबले क्षत्रियों की जिले मे 7% आबादी है लेकिन पार्टी द्वारा संगठन और सरकार मे प्रतिनिधित्व और पूछताछ के मामले मे जमीन आसमान का अंतर है. टिकट मिलना तो दूर टिकट के लिए क्षत्रियों के नाम पर विचार तक नहीं होता.


जिले मे क्षत्रिय जाति की आबादी और भाजपा की जीत मे योगदान को देखते हुए चरथावल, बुढ़ाना और खतौली विधानसभा मे से एक सीट पर क्षत्रिय जाति को टिकट मिलना चाहिए. इसी मांग को लेकर जिले का क्षत्रिय समाज आंदोलित है. जिले की लगभग हर सीट पर क्षत्रिय वोट सबसे बड़ा निर्णायक जातिगत वोटबैंक है क्यूंकि अन्य कई जातियों की तरह क्षत्रिय हर सीट पर चुनाव नहीं लड़ते. अगर क्षत्रियो ने भाजपा से बगावत की तो 40% मुस्लिम आबादी वाले इस जिले मे भाजपा को भारी नुकसान होना निश्चित है. 


सीट वाइज जातिगत वोट और संक्षिप्त टिप्पणी-


चरथावल विधानसभा-


इस सीट पर क्षत्रिय समाज के लगभग डेढ़ दर्जन गांव हैं अधिकतर जिनमे दूधली, बिरालसी, रोनी हरजीपुर जैसे 3 से 4 हजार क्षत्रिय वोट वाले बड़े गांव हैं. सुजडू, कुल्हेड़ी, संधावली जैसे मुस्लिम राजपूतो के बेहद बड़े गांव हैं. जाटों की आबादी लगभग 16-17 गाँवो मे है जिनमे 3-4 बड़े, 4-5 मध्यम आकार के और अन्य छोटे या मिश्रित आबादी वाले गांव हैं. तावली और हरसौली जैसे 3-4 मुस्लिम जाट बहुल बड़े गांव हैं. कश्यप जाति की आबादी बघरा के आसपास के कई छोटे गाँवो मे और जाट बहुल गाँवो मे ज्यादा है. 8-9 छोटे आकार के गांव त्यागियो के हैं. इतने ही गाँव मुस्लिम त्यागियो के हैं जिनमे कुटेसरा बड़ा गांव है. त्यागियो की इतनी आबादी के बावजूद इस क्षेत्र मे मीडिया द्वारा त्यागियो के वोट की गिनती तक नहीं की जाति.


इस सीट पर क्षत्रिय समाज का सबसे बड़ा दावा बनता है. निवर्तमान विधायक की कोरोना से मृत्यु के बाद इस सीट पर नया प्रत्याशी आएगा. 


मुस्लिम = 135000

जाटव = 45000

क्षत्रिय = 32000

कश्यप = 22000

जाट = 20500

सैनी = 12500

ब्राह्मण = 8500

पाल = 6000

प्रजापति = 5500

त्यागी = 9500

बाल्मीकि = 4500

धीमान = 4500

गोसाई = 2500

नाईं = 2250

वैश्य = 2200

जुलाहे =1700

बंजारा = 1650

सुनार = 1450

धोबी = 1200

जोगी = 1200

जैन =1150 

भटनागर = 750

रोड = 900

गूजर = 350

अन्य = 5000


मुस्लिम जाति-


राजपूत = 32 हजार

मूले जाट = 20 हजार

महेसरे(त्यागी) = 16 हजार 

जुलाहे (अंसारी) = 15 हजार

शेख (बनिया) = 12 हजार

तेली (मलिक)= 8 हजार

सैय्यद = 7 हजार

पठान = 7 हजार

गाड़ा (गौड़ ब्राह्मण) = 7 हजार

लोहार/बढ़ई (सैफी) = 5500

कस्साब (कुरैशी)= 4 हजार

फ़क़ीर शेख (जोगी) = 3500

मंसूरी (धुनेरे) = 2 हजार 

सलमानी (नाइ) = 1500

हलालखोर (मेहतर) = 800

अन्य= 5 हजार


बुढ़ाना विधानसभा-


इस सीट मे सिसौली कस्बे के होने के कारण इसे जाटों का गढ़ माना जाता है. जबकि इस सीट पर डेढ़ लाख से ऊपर मुसलमान और सिर्फ 40 हजार जाट वोट हैं. 1 लाख 30 हजार से ऊपर गैर जाट- गैर जाटव वोट है जिनकी एकतरफा वोट के दम पर भाजपा का जाट प्रत्याशी जाटों के विरोध मे वोट करने के बावजूद विधायक है. इस बार के चुनावों मे भी भाजपा से जाट प्रत्याशी के जवाब मे ध्रुविकरण से बचने के लिए गठबंधन से भी जाट प्रत्याशी होने की सम्भावना है जिसका मतलब 40% मुसलमान होने के बावजूद कोई मुस्लिम प्रत्याशी भी इस बार नहीं होगा और मुसलमानो को भी जाट को वोट करना पड़ेगा. 


इस सीट पर क्षत्रिय जाति के लगभग 15 बड़े गांव हैं जिनमे डेढ़ हजार से लेकर तीन हजार तक क्षत्रिय वोट हैं और साथ मे रवा राजपूतो की 7-8 अन्य गाँवो मे आबादी है. मुस्लिम राजपूतो के लगभग 10 बेहद बड़े और पिछड़े गांव हैं जिनमे जौला, रियावली नंगला, दभेड़ी, भनेड़ा, टोडा कल्याणपुर, लोई, मंडवाड़ा, जोगीखेड़ा आदी हैं. जाति के मामले मे इस सीट पर सबसे ज्यादा वोट मुस्लिम राजपूतो के हैं. जाटों की आबादी अधिकतम 25 गाँवो मे ही है जिनमे 7-8 बड़े गांव, 6-7 मध्यम आकार के गांव और अन्य छोटे या मिश्रित आबादी वाले गांव हैं. 2-3 गांव मुले जाटो के भी हैं. इसी तरह लगभग डेढ़ दर्जन गांव त्यागियो के हैं जो सभी छोटे आकार के हैं. इस सीट पर भी मीडिया द्वारा त्यागियो की गिनती नहीं की जाति. इस क्षेत्र मे 10-12 छोटे गांव सैनी बाहुल्य भी हैं और अन्य गाँवो मे भी सैनियों की आबादी है. इस सीट पर भाजपा के टिकट पर क्षत्रिय, सैनी या त्यागी जाति का दावा बनता है. जाटों के भाजपा विरोध मे रहने के कारण यहां भाजपा से जाटों को टिकट देने का कोई औचित्य नहीं है. 


कुल वोट = 360000

 

मुस्लिम = 1,60,000

जाट = 40000

क्षत्रिय = 33500

जाटव =  28000

सैनी = 18000

त्यागी = 16500

कश्यप = 13500

ब्राह्मण = 11500

उपाध्याय = 7500

प्रजापति = 6000

वैश्य = 5200

विश्वकर्मा = 4500

जैन = 3200

पाल = 3000

गोस्वामी = 3000

सुनार = 2500

नाई = 2500

वाल्मीकि = 2500

कोरी = 1500

खटीक = 1200

गूजर = 400

अन्य = 5000


मुस्लिम जातियां


राजपूत = 42000

जुलाहे (अंसारी) = 22000

मुले जाट = 18000

शेख (बनिया) = 16000

महेसरे (त्यागी) = 15000

पठान = 15000

लोहार/बढ़ई (सैफी) = 6500

तेली (मलिक) = 6000

कस्साब (कुरैशी)= 5000

फ़क़ीर शेख (जोगी) = 4000

मुगल = 4000

मंसूरी (धुनेरे) = 2000

सलमानी (नाई ) = 1200

भिश्ती = 1200

हलालखोर (मेहतर) = 800

अन्य= 5 हजार


मुजफ्फरनगर विधानसभा


यह शहरी सीट है और भाजपा का गढ़ है. शहर मे क्षत्रिय जाति के लगभग 1200-1400 परिवार निवासरत है. 


वैश्य- 52000

चमार- 25000

ब्राहमण- 30000

पंजाबी/सिक्ख- 15000

पाल- 17000

जाट-11000

क्षत्रिय - 7500

धीमान- 7000

जोगी/गुसाईं- 7000

सैनी- 6500

प्रजापति- 6500

कश्यप- 5500

बाल्मिकी- 5000

त्यागी- 5000

कोरी - 4500

सुनार- 4000

नाई- 4000

खटीक- 3000

धोबी- 1500

कायस्थ- 1500

गूजर- 1200

अन्य- 8000 

    

    

मुसलमान- 145000


शेख- 30000

जुलाहे(अंसारी) - 20000

सैय्यद- 10000

सैफी- 15000

तेली- 10000

पीर/फ़क़ीर- 10000

पठान- 8 हजार 

गाढ़ा- 7000

कसाई (कुरैशी)- 7000

मनिहार- 5000

सलमानी- 3000

माहिगीर(झीवर)- 2500

अन्य- 20000


खतौली विधानसभा


यह मिश्रित आबादी वाली सीट है. इस सीट पर 10-12 सोम और चौहान राजपूतो के गांव हैं. इनके अलावा यहां रवा राजपूतो के सत्ताइसवाड़ा का बड़ा हिस्सा लगता है जिसमे 27 गांव रवा राजपूतो के हैं.  यहां सैनी जाति की बड़ी आबादी है जिनके गांव पूरे विधानसभा मे बिखरे हैं. जाटों के यहां 3-4 गांव बड़े और 8-10 छोटे गांव हैं. गूजर जाति के यहां 8-9 छोटे गांव हैं. इतनी कम आबादी के बावजूद पिछले दोनों चुनाव मे यहां गूजर प्रमुख पार्टियों के टिकट पर चुनाव लड़े हैं और एक बार विधायक भी रह चुका है लेकिन भाजपा समर्थक होने के कारण क्षत्रियों पर कोई पार्टी विचार भी नहीं करती. रवा राजपूत समाज यहां से टिकट की मांग करता आया है और पार्टी द्वारा इस पर विचार किया जाना चाहिए. 


चमार- 45000

सैनी- 30000

क्षत्रिय- 30000

जाट- 17000

गूजर - 10000

वैश्य- 9000

प्रजापति- 8500

ब्राहमण- 8000

पाल-7000

कश्यप- 6500

जैन- 5000

उपाध्याय- 4000

गोस्वामी- 3500

धीमान- 4500

पंजाबी/सिक्ख- 4000

त्यागी- 4500

नाई/सेन- 4000

बाल्मिकी- 3000

खटीक- 2700

कोरी- 2000

धोबी/हिन्दू- 1500

नट- 500

अन्य- 5-10000


मुस्लिम- 1,00,000


शेख- 20000

अंसारी- 15000

सैय्यद- 15000

सैफी- 8000

कुरैशी- 8000

तगा- 6000

राजपूत- 5000

तेली- 4000

फ़क़ीर- 4000

अन्य-10-15000


पुरकाजी विधानसभा-


इस विधानसभा मे मुजफ्फरनगर शहर से लगते 5-6 क्षत्रियों के गांव आते हैं. शहर के लगते हिस्से सरवट मे भी क्षत्रियों के काफी वोट हैं. खादर के पास चौहानो की कुछ आबादी है. इस सीट पर त्यागियो के 12-15 बड़े और छोटे गांव हैं. जाटों के 15-16 गांव दो बेल्ट मे हैं. मुसलमानो मे गाढ़ा जाति के सबसे ज्यादा गांव हैं. 


चमार- 55500

जाट- 24500

त्यागी- 22000

सैनी- 18000

ब्राहमण- 15000

क्षत्रिय - 11500

कश्यप- 11000

पाल- 9000

गूजर- 7500

प्रजापति- 7000

वैश्य - 6500

धीमान- 4500

गोस्वामी- 4000

बंजारा- 4000

पंजाबी- 3500

नाई- 2500

उपाध्याय- 2000

सुनार- 1500

नट- 1200

अन्य - 20000


मुस्लिम- 1,20,000


गाढ़ा - 22000

शेख - 20000

महेसरे (त्यागी) - 12000 

अंसारी- 15000

राजपूत- 10000

सैय्यद- 10000

तेली - 8000

मुले जाट - 5000

अन्य- 15-20000


मीरापुर विधानसभा-


यह मुस्लिम बाहुल्य विधानसभा है जिसमे सैय्यद बाहुल्य कई कस्बे हैं. झोझा नाम की मुस्लिम किसान जाति की भी बड़ी आबादी है. यहां का खादर चौहान बाहुल्य है. इसके अलावा बांगर मे रवा राजपूतो के कई गांव हैं.


चमार- 45000

जाट- 24000

गूजर- 15000

पाल- 18000

सैनी- 14000

क्षत्रिय- 14000

प्रजापति-11000

कश्यप- 9000

ब्राहमण- 8000

वैश्य- 7500

बंजारे- 4500

बाल्मीकि - 3500

जोगी- 3000

त्यागी- 2000

खटीक- 1300

कोरी/जुलाहे-2000

नट- 1500

अन्य - 15-20000


मुस्लिम- 1,30,000


झोझा- 35000

सैयद- 25000

अंसारी- 15000

कुरैशी- 12000

शेख - 12000

राजपूत- 11000

अन्य मुस्लिम- 20000

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